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छपरा में फर्जी आईएएस की एंट्री, डीएम से 20 मिनट की मुलाकात के बाद खुली पोल

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छपरा में प्रशासनिक गलियारों को चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक खुद को आईएएस अधिकारी बताकर न सिर्फ समाहरणालय में बेखौफ घूमता रहा, बल्कि जिलाधिकारी से आमने-सामने मुलाकात भी कर ली। आत्मविश्वास, पहनावे और बातचीत के अंदाज से उसने अधिकारियों को भी कुछ देर तक भ्रम में रखा, लेकिन आखिरकार जिलाधिकारी की सतर्कता से उसकी असलियत सामने आ गई और वह सलाखों के पीछे पहुंच गया।
सोमवार दोपहर करीब तीन बजे रितेश कुमार पंडित नाम का युवक छपरा समाहरणालय पहुंचा। आदेशपाल से उसने खुद को मेरठ में तैनात आईएएस अधिकारी बताया और जरूरी काम के बहाने डीएम से मिलने की बात कही। उसके हाव-भाव और बातचीत के आत्मविश्वास से प्रभावित होकर उसे जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंचा दिया गया। इसके बाद जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव से उसकी मुलाकात हुई।
करीब 20 मिनट तक चली बातचीत में युवक ने खुद को 2022 बैच का आईएएस बताते हुए उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में नगर आयुक्त होने का दावा किया। बातचीत के दौरान उसकी भाषा, तथ्यों की जानकारी और व्यवहार में जिलाधिकारी को कुछ असंगतियां महसूस हुईं। जब डीएम ने उससे आधिकारिक पहचान पत्र और सेवा से जुड़े दस्तावेज मांगे, तो वह घबरा गया और टालमटोल करने लगा। यहीं से शक गहराया और सख्ती से पूछताछ की गई।
पूछताछ में युवक टूट गया और उसने कबूल किया कि वह न तो आईएएस है और न ही किसी सरकारी पद पर तैनात। उसकी पहचान छपरा जिले के बसाढ़ी गांव निवासी रितेश कुमार पंडित के रूप में हुई। इसके बाद जिलाधिकारी ने तत्काल सुरक्षा कर्मियों को बुलाकर उसे टाउन थाना पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने धोखाधड़ी और सरकारी अधिकारियों को गुमराह करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
जांच में यह भी सामने आया कि रितेश दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहकर यूपीएससी और बीपीएससी की तैयारी करता था। वह खुद को अधिकारी बताकर सरकारी दफ्तरों में रौब झाड़ता, लोगों का काम निकलवाने का दावा करता और इसके बदले मोटी रकम वसूलता था। गांव में भी वह इसी झूठी पहचान के सहारे अपनी धाक जमाए हुए था।
पुलिस के अनुसार आरोपी इससे पहले भी कई बार समाहरणालय आ चुका था। वह डीएम से मिलने से पहले एसएसपी विनीत कुमार से भी मिल चुका था और पूर्व जिलाधिकारी तथा एसपी से भी संपर्क में रहा है। सदर एएसपी रामपुकार सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी को संदेह होने पर पूरे मामले की जांच की गई, जिसके बाद फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह टिप-टॉप बनकर अधिकारियों पर रौब डालकर अपना काम करवा लेता था, लेकिन इस बार पकड़ा गया।
फिलहाल पुलिस आरोपी के नेटवर्क, अब तक की गई ठगी और उसके संपर्क में आए लोगों की जानकारी जुटा रही है। इस घटना ने प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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